Monday, 19 August 2019

2019 जन्माष्टमी शुभ मूहू्र्त, महत्व, पूजा विधि

2019 जन्माष्टमी   शुभ मूहू्र्त, महत्व, पूजा विधि 

23 अगस्त शुक्रवार को अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र से युक्त अत्यंत पुण्यकारक जयंती योग में मनाया जाएगा। वही वैष्णव संप्रदाय व साधु संतो की कृष्णाष्टमी 24  अगस्त दिन  शनिवार को उदया तिथि अष्टमी एवं औदयिक रोहिणी नक्षत्र से युक्त सर्वार्थ अमृत सिद्धियोग में मनाई जाएगी।
                          कृष्ण जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त  
जन्माष्टमी 2019
24 अगस्त
निशिथ पूजा– 00:01 से 00:45
पारण– 05:59 (24 अगस्त) सूर्योदय के पश्चात
रोहिणी समाप्त- सूर्योदय से पहले
अष्टमी तिथि आरंभ – 08:08 (23 अगस्त)
अष्टमी तिथि समाप्त – 08:31 (24 अगस्त)
कृष्णा जन्माष्टमी का महत्व शास्त्रों के अनुसार जन्माष्टमी को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में जन्म लिया था। भगवान विष्णु ने कृष्ण का अवतार का कंस के धरती पर बढ़ रहे पापों का अंत करने के लिए लिया था।
कृष्णा जन्माष्टमी पूजा विधि  
1.जन्माष्टमी का व्रत अष्टमी तिथि से प्रांरभ होता है और नवमी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है। 
2.जन्माष्टमी का व्रत करने वाले साधक को सूबह जल्दी उठकर नहा कर साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।
 3.हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर संकल्प करके मध्यान्ह के समय काले तिलों के जल से स्नान (छिड़ककर) कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएँ। अब इस सूतिका गृह में सुन्दर बिछौना बिछाकर उस पर शुभ कलश स्थापित करें।
4.साथ ही भगवान श्रीकृष्ण जी को स्तनपान कराती माता देवकी जी की मूर्ति या सुन्दर चित्र की स्थापना करें। पूजन में देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी इन सबका नाम क्रमशः लेते हुए विधिवत पूजन करें। 
5.जन्माष्टमी का व्रत रात्रि बारह बजे के बाद ही खोला जाता है। इस व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता। फलहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फ़ी और सिंघाड़े के आटे का हलवा बनाया जाता है।
जन्माष्टमी पर कैसे करें भगवान श्री कृष्ण का श्रृंगार 
1.भगवान श्री कृष्ण को श्रृंगार अत्याधिक पसंद है। इसलिए सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण का फूलों से श्रृंगार करें। 
2. इसके लिए आप पीले फूलों का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन अगर आप भगवान श्री कृष्ण का वैजयंती के फूलों से श्रृंगार करते हैं तो आपके लिए काफी शुभ रहेगा।
 3.भगवान श्री कृष्ण को जन्माष्टमी पर पीले रंग के वस्त्र, गोपी चंदन का प्रयोग कर सकते हैं। 4.भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा को गहनों और वस्त्रों से सजाए। 
5.भगवान श्री कृष्ण को जन्माष्टमी के दिन काले रंग की कोई भी चीज अर्पित न करें नहीं तो आपको भगवान श्री कृष्ण के क्रोध का पात्र बनना पड़ेगा।
जन्माष्टमी पर इन मंत्रों का करें जाप 
 1.व्यापार और रोजगार के लिए जन्माष्टमी पर 'कृं कृष्णाय नमः' मंत्र का जाप करें। 
2.परिवार में सुख और शांति के लिए जन्माष्टमी पर 'लीलादंड गोपीजनसंसक्तदोर्दण्ड बालरूप मेघश्याम भगवन विष्णो स्वाहा' मंत्र का जाप करें।
 3.किसी भी कार्य में शीघ्र सफलता के लिए जन्माष्टमी पर 'ॐ श्रीं नमः श्रीकृष्णाय परिपूर्णतमाय स्वाहा ' मंत्र का जाप करें।
 4.मान- सम्मान प्राप्त करने के लिए जन्माष्टमी पर 'ॐ कृष्ण कृष्ण महाकृष्ण सर्वज्ञ त्वं प्रसीद मे | रमारमण विद्येश विद्यामाशु प्रयच्छ मे ' मंत्र का जाप करें। 

5.आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए जन्माष्टमी पर 'क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः' मंत्र का जाप करें। 
6. संतान प्राप्ति के लिए जन्माष्टमी पर 'ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय ' मंत्र का जाप करें। 
7.विवाह संबंधी बाधा दूर करने के लिए जन्माष्टमी पर'ॐ स: फ्रें क्लीं कृष्णाय नम:' मंत्र का जाप करें। 8.व्यापार में तरक्की पाने के लिए जन्माष्टमी पर 'ॐ क्लीं क्लीं क्लीं कृष्णाय नम:' मंत्र का करें जाप करें। 
9.रूप और सौंदर्य पाने के लिए जन्माष्टमी पर 'ॐ हुं ऐं नम: कृष्णाय' मंत्र का जाप करें। 
10.सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए जन्माष्टमी पर 'ॐ नमो भगवते नन्दपुत्राय आनन्दवपुषे गोपीजनवल्लभाय स्वाहा' मंत्र का जाप करें।

Wednesday, 14 August 2019

ज्योतिष - पंच-तत्व जातक पर किस तत्व ग्रह का सर्वाधिक प्रभाव है ।

ज्योतिष - पंच-तत्व

 ग्रहों के बलवान होने से जातक में तत्व-वृद्धि होती है और शरीर लक्षण से विद्वान जान लेते है कि - जातक पर किस ग्रह का सर्वाधिक प्रभाव है ।


-मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि किस तरह बलवान होकर तत्व-रूप में अपना प्रभाव प्रकट करते है ।
सूर्य और चंद्र का इसमे समावेश नही है । केवल पंचतारा ग्रह ही ऐसे अपना प्रभाव प्रकट कर पाते हैं ।
 सूर्य - सितारा है, जो पंचतारा ग्रहों को सक्रिय करता है और चंद्र, पृथ्वी का उपग्रह है - जो पृथ्वी और सूर्य के तालमेल से अपना प्रभाव प्रकट करता है ।  बाकि के बचे पंचतारा ग्रह - अपना तत्व प्रकट करने में समर्थ है । हालांकि -
सूर्य और चंद्र भी अग्नि-तत्व प्रधान और जल-तत्व प्रधान ग्रहों से सम्बद्ध बनाये तो अपने-अपने तत्व की वृद्धि करते हैं । सूर्य - अग्नि-तत्व की और चंद्र - जल-तत्व की वृद्धि करते हैं ।
• अगर - मंगल बलवान हो तो जातक में अग्नि-तत्व प्रबल होगा । ऐसे में - जातक अधिक भूख वाला, चंचल, फुर्तीला, निडर, पतला, बुद्धीमान, अधिक खाने वाला, तीखा स्वभाव, गोरा रंग और स्वाभिमानी होता है । जब अग्नि तत्व की छाया जातक में प्रकट होती है - तब जातक सोने की चमक की तरह चमकदार दिखता है । उसकी आँखों मे आकर्षण और सफलता भरे कार्य होते हैं तथा प्रचुर धनलाभ होता है ।
अष्टक वर्ग के अनुसार मेष, सिंह और धनु राशि बलवान हो और कुण्डली अनुसार 1, 5 और नवम भाव बलवान हो तो - अग्नि-तत्व और भी प्रबल हो जाता है ।
• अगर - बुध बलवान हो तो जातक में पृथ्वी-तत्व प्रबल होता है । ऐसे में जातक स्वाभाविक गन्ध युक्त, कपूर और कमल की खुशबू वाला, भोग भोगने वाला, सदैव सुखी, बलवान, क्षमाभाव से युक्त और शेर की तरह दबंग आवाज वाला होता है । जब शरीर मे बलवान पृथ्वी-तत्व की छाया प्रकट होती है - तब जातक की त्वचा कान्ति युक्त, दाँत और नाखून विशेष चमकदार, धर्म और अर्थ का लाभ पाने वाला तथा भरपूर सुख पाता है ।
अष्टक वर्ग के अनुसार वृषभ, कन्या और मकर राशि बलवान हो और कुण्डली अनुसार 2, 6 और दशम भाव बलवान हो तो - पृथ्वी-तत्व और भी प्रबल हो जाता है ।
• अगर - गुरु बृहस्पति बलवान हो तो जातक में आकाश-तत्व प्रबल होता है ।  ऐसे में - जातक शब्दार्थ को जानने वाला, बातों के गूढ़ अर्थ समझने वाला, नीति विशारद, ज्ञानी, स्पष्टवादी, खरा, बड़े मुँह वाला लम्बे कद वाला होता है । जब शरीर की आकाश-तत्व की छाया प्रकट होती है - तब जातक वाक्पटु, देखने मे सुन्दर, मनोहर बात बोलने वाला और मनोहर बात सुनने वाला होता है ।
प्रकारान्तर से गुरु बृहस्पति में आकाश-तत्व के अलावा वायु-तत्व की भी प्रबलता रहती है ।  ऐसे में - कुण्डली में वायु-तत्व राशियाँ और वायु-तत्व भाव बलवान हो और ऐसे किसी राशि अथवा भाव में बलवान गुरु बृहस्पति हो और लग्न-लग्नेश से संबंध बना ले तो आकाश-तत्व की बढ़ोतरी हो सकती है ।
• अगर - शुक्र बलवान हो तो जातक में जल-तत्व प्रबल होता है । ऐसे में - जातक कान्तियुक्त, उत्तरदायित्व को उठाने वाला, प्रिय वचन बोलने वाला, अधिकार-युक्त, अनेक मित्रों वाला, कोमल स्वभाव वाला और विद्वान होता है । जब - जल-तत्व की छाया शरीर मे प्रकट होती है - तब जातक कोमलता से व्यवहार करने वाला, स्वस्थ, अभीष्ट सिद्धी पाने वाला, मनोरथ पूर्ण करने वाला और अनुकूल भोजन पाने वाला होता है ।
अष्टक वर्ग के अनुसार कर्क, वृश्चिक और मीन राशियां बलवान हो और कुण्डली अनुसार 4, 8 और 12 भाव बलवान हो तो - जल-तत्व और भी प्रबल हो जाता है ।
• अगर - शनि कुण्डली में बलवान हो तो जातक में वायु-तत्व प्रबल होता है । ऐसे में - जातक दानी स्वभाव वाला परन्तु क्रोधी होता है । गोरा रंग, घूमने का शौकीन, अधिकार-युक्त, न दबने वाला और पतले शरीर वाला होता है । जब - वायु-तत्व की छाया शरीर मे प्रकट होती है  - मन मे मलिनता आ जाती है, विचार दृढ़ और तीव्र नही रहते, निर्णय करने में भूल होती है, वायु-रोग, शोक और सन्ताप होते है । ये कदाचित शनि की विशेषता है ।
अष्टक वर्ग के अनुसार मिथुन, तुला और कुम्भ राशियां बलवान हो और कुण्डली अनुसार 3, 7 और एकादश भाव बलवान हो तो - वायु-तत्व और भी बलवान हो जाता है ।

ज्योतिष कुण्डली-मन्थन


 कल्पना करें कि - कुण्डली आपका घर है,
इसके बारह भाव आपके घर के बारह कमरे हैं और नौ ग्रह इस घर के नौ पारिवारिक सदस्य हैं । ये आपका घर है । आप एक ऐसे बड़े घर मे रहते है - जहां बारह कमरे है और नौ पारिवारिक सदस्य है । कौन सा कमरा किस कारण से है और उसमें क्या रखा हुआ है । इसका आपको पता होना चाहिये । किसी-किसी कमरे में पारिवारिक सदस्य भी रहते है और कई-कई सदस्य भी रहते है । कुछ पारिवारिक सदस्य घर के लिये लाभदायक हैं और कुछ लाभदायक नही है । कुछ कमरे भी खाली पड़े है लेकिन उनमें भी कुछ सामान भी रखा है - जो समय आने पर घर के काम आयेगा ।

इन नौ पारिवारिक सदस्यों में से पाँच सदस्य - सदा ही सक्रीय रहते है । महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा, सूक्ष्म दशा और प्राणदशा के रूप में ये घर का काम करते रहते है । चार सदस्य प्रत्यक्ष रूप से निष्क्रीय दिखते है लेकिन गोचर के रूप में बाज़ार आना-जाना इनका भी लगा रहता है और कुछ ना कुछ लाते-ले-जाते रहते हैं ।
बहरहाल, इन बारह कमरों में कौन सा सामान रखा है और नौ पारिवारिक सदस्य उनमे कहाँ-कहाँ रह रहे है । इसकी पुख्ता जानकारी आपको अपने घर से वाकिफ करवायेगी । अन्यथा - आप अपने घर से वाकिफ नही है तो आप इसका उपयोग अपने लिये नही कर पायेंगे और हो सकता है कि - यही घर ऐसे में आपका उपयोग अपने लिये कर डाले । अर्थात - आप नकारात्मक ऊर्जा वाले पारिवारिक सदस्यों के प्रभाव में आ सकते है और आपका जीवन व्यर्थ चला जा सकता है । क्योंकि - इन नौ पारिवारिक सदस्यों का सार्थक उपयोग ही आपके जीवन को सार्थक करेगा ।
घर के अन्दर - छट्ठा, आठवाँ और बारहवाँ तीनों कमरे - रोगाणुओं, पुराने सामान और अपयश देने वाले सामान से भरे हैं । जब कभी - घर के गणमान्य और उर्जावान सदस्य गुरु, शुक्र, बुध और चंद्र इन कमरों में रहने चले जाते है - तब घर का वातावरण दूषित होने लगता है । ऐसे में - घर के मालिक के रूप में हमे इनकी सहायता करनी चाहिये । इनका अन्न खाना चाहिये, इनकी धातुयें धारण करनी चाहिये, इनके मन्त्रों का उच्चारण करना चाहिये और इनके रत्न धारण करने चाहिये । ताकि ये हमारी ओर आकर्षित रहें और उन कमरों की प्रदूषित वायु से बचे रहें ।
इसी क्रम में - घर का पहला, पाँचवां और नौवाँ तीनों कमरे - स्वास्थ वर्धक, मान-सम्मान देने वाले और भाग्य-वर्धक सामानों से भरे हुये है । इन कमरों में जब भी घर के गणमान्य और ऊर्जावान सदस्य गुरु, शुक्र, बुध और चंद्र रहते हैं - तब घर का वातावरण शक्तिवर्धक हो जाता है ।
हालांकि - इन्ही कमरों में विध्वंसक और नकारात्मक ऊर्जा से युक्त ग्रह -मंगल, शनि और राहु रहने लगे तो - स्वास्थ, मान-सम्मान और भाग्य में कमी होने लगती है ।

सूर्य - ये घर का प्रमुख सदस्य है और सारे घर का कर्ता-धर्ता है । यह सदस्य घर का भविष्य निर्धारित करता है । अगर - यह बलवान हो और कारक हो तो राजा की तरह व्यवहार करता है और घर की उन्नति के लिये दिशा-निर्देश प्रस्तुत करता है । जैसे कोई - सफल व्यापारी बढ़ती उम्र के साथ घर-परिवार का मार्गदर्शन करें ।
लेकिन यही सदस्य - अगर कारक हो और निर्बल हो तो बढ़ती उम्र में बीमार बुजुर्ग की तरह होता है । जो भविष्य के मापदण्ड तय नही कर पाता है । इससे दूसरे सदस्य कितना भी अच्छा कार्य करें लेकिन घर का भविष्य निश्चित नही होता है । इसी क्रम में - सूर्य, अगर अकारक हो और बलवान भी हो तो घर के अधिकतर कार्य सरकारी खानापूर्ति में गुजरते हैं और घर के दूसरे सदस्यों की योग्यता का इसमे व्यर्थ का उपयोग होता है । लेकिन - सूर्य, अगर अकारक हो और निर्बल भी हो तो घर का भविष्य अंधकारमय होता है और घर भाग्य के भरोसे होता है । क्योंकि - घर के एक तिहाई प्रशासन का संचालन इसके द्वारा होता है ।
जो भी हो - घर के इस बुजुर्ग और प्रमुख सदस्य का बलवान होना - किसी भी तरह से घाटे का सौदा नही है ।

Monday, 12 August 2019

शुक्र का सिंह राशि में गोचर (16 अगस्त, 2019)

 मान्यता है कि भगवान शिव के वरदान से शुक्राचार्य इस पृथ्वी लोक और परलोक की सारी संपत्ति के स्वामी हैं। वहीं आदिपर्व के अनुसार, शुक्र संपत्तियों का ही नहीं बल्कि औषधि और मंत्र आदि के भी स्वामी माने गये हैं। वैदिक ज्योतिष में शुक्र को लाभ दाता ग्रह माना गया है। शुक्र को कला, प्रेम, सांसारिक और वैवाहिक सुख का कारक कहा जाता है। शुक्र के प्रभाव से भौतिक और वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसे में अगर किसी जातक की कुंडली में शुक्र की स्थिति शुभ न हो अथवा वह पीड़ित हो तो जातक को भौतिक और वैवाहिक सुखों का आनंद नहीं मिल पाता है और उसे जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए जातकों को शुक्र की शांति के उपाय करने चाहिए जिससे की उन्हें शुक्र के शुभ फलों की प्राप्ति हो सके।



गोचर का समय व अवधि

शुक्र ग्रह 16 अगस्त 2019, शुक्रवार को रात्रि 20:23 बजे सिंह राशि में गोचर करेगा और 10 सितम्बर 2019, मंगलवार को प्रातः 01:24 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। ऐसे में शुक्र के इस गोचर का प्रभाव आपकी राशि में भी पड़ेगा और इसका असर सीधे आपके दैनिक जीवन पर पड़ेगा। 

मेष

शुक्र आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर करेगा। कुंडली में इस भाव को संतान भाव के नाम से भी जाना जाता है। इस भाव से रोमांस, संतान, रचनात्मकता, बौद्धिक क्षमता, शिक्षा एवं नए अवसरों को देखा जाता है। शुक्र का यह गोचर आपके प्रेम संबंधों में मिठास लाएगा। रिश्तों में प्यार के बढ़ने से निजी संबंध मज़बूत होंगे। अगर आप सिंगल हैं तो किसी के साथ प्यार की नई शुरुआत हो सकती है। अगर पहले से ही प्यार में हैं तो पार्टनर के साथ विवाह की बात भी चल सकती है। हालांकि छोटे-मोटे लड़ाई-झगड़े भी होते रहेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को पढ़ाई में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। उनका मन पढ़ाई की बजाय कहीं और लग सकता है। लेकिन मेहनत करने पर छात्रों को सफलता भी मिलने की संभावना है। वैवाहिक जीवन में संतान प्राप्ति की चाह फलीभूत हो सकती है। संतान की ओर से आपको ख़ुशियाँ प्राप्त होंगी। उनकी कामयाबी से स्वयं को गौरवान्वित महसूस करेंगे। इस दौरान उनकी सेहत का भी ख़्याल रखें। आर्थिक जीवन में शुक्र का गोचर आपको सफलता प्रदान करेगा। आपके अच्छे कार्यों में परिजनों का भी सहयोग प्राप्त होगा।
उपाय: शुक्रवार के दिन कन्याओं को मोमबत्तियां दान करें।

वृषभ

शुक्र आपकी राशि से चतुर्थ भाव में गोचर करेगा। कुंडली के चौथे भाव को सुख भाव कहा जाता है। इस भाव से माता, जीवन में मिलने वाले सभी प्रकार के सुख, चल-अचल संपत्ति, लोकप्रियता एवं भावनाओं को देखा जाता है। शुक्र के गोचर से आप अपने निजी जीवन से प्रसन्न रहेंगे। घर-परिवार में ख़ुशियाँ आएँगी। अगर आप जॉब के कारण घर से दूर रहते हैं तो परिजनों के साथ समय बिताने का मौ़क़ा मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में भी परिस्थितियाँ आपके अनुकूल होंगी। इस अवधि में आपकी आर्थिक परेशानियाँ दूर होंगी। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। साथ ही आपकी लोकप्रियता में वृद्धि होगी। आर्थिक जीवन से भी आपको सकारात्मक परिणामों की प्राप्ति होगी। शुक्र के गोचर से आपकी चल-अचल संपत्ति में वृद्धि होगी। इस दौरान आप कोई नया वाहन या फिर किसी प्रकार की नई संपत्ति आदि ख़रीद सकते हैं। घर के सौंदर्यीकरण में धन के ख़र्च होने की संभावना है। माता जी की सेहत अच्छी रहेगी। उनके साथ आपके संबंध मधुर होंगे और उनके आशीर्वाद से आप कोई शुभ कार्य कर सकते हैं।
उपाय: शुक्रवार के दिन उंगली में हीरा धारण करें, शुभ रहेगा।

मिथुन

शुक्र आपकी राशि से तृतीय भाव में जाएगा। कुंडली में तीसरे घर को सहज भाव कहा जाता है। इस भाव से व्यक्ति के साहस, इच्छा शक्ति, छोटे भाई, जिज्ञासा, जुनून, ऊर्जा, जोश और उत्साह को देखा जाता है। इस गोचर के प्रभाव से आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी। आप निडरता से अपनी बातों को रखेंगे। साथ ही आपके व्यक्तित्व का भी विकास होगा और आपके अंदर आत्म-विश्वास बढ़ेगा। किसी मुनाफ़े के लिए आप जोख़िम उठाना पसंद करेंगे। कार्य क्षेत्र में आपकी ऊर्जा आपको सदैव कार्य के प्रति क्रियाशील बनाए रखेगी। इस दौरान अति आत्मविश्वास से बचें। क्योंकि यह आपकी छवि को चोट पहुँचा सकता है। वैवाहिक जीवन में आपको आनंद आएगा और प्रेम जीवन में रिश्ते प्रगाढ़ होंगे। हालाँकि किसी बात को लेकर लाइफ/लव पार्टनर से बहसबाज़ी भी संभव है। ऐसी स्थिति में ख़ुद को शांत रखें। छात्रों को पढ़ाई में आनंद आएगा और इस दौरान उनका प्रदर्शन भी प्रशंसनीय रह सकता है।
उपाय: भगवान शिव की पूजा करें और उन्हें सफेद चंदन व फूल चढ़ाएं।

कर्क

शुक्र आपकी राशि से द्वितीय भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में दूसरे भाव से व्यक्ति के परिवार, उसकी वाणी, प्रारंभिक शिक्षा एवं धन आदि का विचार किया जाता है। इस दौरान आपको कई वित्तीय फायदे होंगे और आप अपने भविष्य के लिए अच्छी रक़म जोड़ सकेंगे। आय के स्रोतों में वृद्धि होने की संभावना है। शुक्र का गोचर आपके आर्थिक पहलू को और भी मजबूत स्थिति में लाएगा। आर्थिक पक्ष को लेकर कोई रुकी हुई योजना पुनः प्रारंभ हो सकती है। प्रॉपर्टी से भी फायदा संभव है। संवाद शैली में सुधार आएगा और आप दूसरों को अपनी बातों से आकर्षित कर पाएंगे। घर-परिवार में कोई समारोह हो सकता है या फिर किसी नए मेहमान का आगमन भी संभव है। घर में परिजनों के बीच सामंजस्य का वातावरण देखने को मिल सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में जातकों का मन थोड़ा पारिवारिक मुद्दों पर अधिक लग सकता है। इस दौरान उनकी पढ़ाई में व्यवधान पैदा हो सकता है।
उपाय: शनिवार को बजरंग बली को सिंदूर चढ़ाएं।

सिंह

शुक्र ग्रह आपकी ही राशि में गोचर करेगा जो प्रथम भाव में स्थित होगा। ज्योतिष में लग्न भाव को तनु भाव कहा जाता है। इस दौरान आप अपने अच्छे कार्यों के लिए जाने जाएंगे। बीते समय में किए गए संघर्षों का लाभ इस दौरान प्राप्त होगा। शुक्र के प्रभाव से आपके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा जिससे आपके प्रति लोग आकर्षित होंगे। गंभीर मुद्दों पर लोग आपकी सलाह ले सकते हैं। भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। अपने लिए कुछ ऐसा करेंगे जिससे आपको खुशी हासिल होगी। शादीशुदा ज़िंदगी में सुधार आएगा हालांकि थोड़े बहुत झगड़े संभव हैं इसलिए कुछ ऐसा न कहें या करें जिससे बात आगे बढ़े। वहीं प्रेम जीवन में साथी आपकी ओर अधिक आकर्षित होगा। यदि आप कला, संगीत, अभिनय, लेखन आदि क्षेत्र से संबंध रखते हैं तो आपको गोचर के दौरान अधिक लाभ होने के संभावना है।
उपाय: शुक्रवार के दिन मंदिर में देवी को लाल गुलाब अर्पित करें।

कन्या

शुक्र आपकी राशि से द्वादश भाव में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में यह भाव व्यय भाव कहलाता है। इस भाव से ख़र्चे, हानि, मोक्ष, विदेश यात्रा आदि को देखा जाता है। गोचर के दौरान भोग-विलास के प्रति आपका मन ज़्यादा लगेगा और मन वासनात्मक क्रियाओं में अधिक लगेगा। आर्थिक जीवन की बात करें तो, आपके ख़र्चों में वृद्धि होने की प्रबल संभावना है। अनावश्यक रूप से धन ख़र्च होगा। ऐसी स्थिति में आपको अपने व्यय को नियंत्रण में रखना होगा अन्यथा आपके सामने आर्थिक संकट की घड़ी आ सकती है। विदेश गमन के योग बन रहे हैं। करियर में नए अवसर के लिए आप विदेश की ओर भी अपना रुख़ कर सकते हैं। लंबी दूरी की यात्रा संभव है। यह यात्रा आपके लिए लाभकारी सिद्धि हो सकती है। पिकनिक या कहीं बाहर घूमने जाने का प्लान बन सकता है। जीवन साथी की सेहत बिगड़ सकती है। ऐसे में उनकी सेहत का ख़्याल रखें।
उपाय: शुक्रवार के दिन भगवान शिव को दही व चीनी का भोग लगाएं और फिर ब्राह्मणों को दान करें।

तुला

शुक्र आपकी राशि से एकादश भाव में स्थित होगा। कुंडली में एकादश भाव को आमदनी का भाव कहा जाता है। इस भाव से आय, जीवन में प्राप्त होने वाली सभी प्रकार की उपलब्धियाँ, मित्र, बड़े भाई-बहन आदि को देखा जाता है। इस दौरान आपके जीवन में खुशहाली व समृद्धि आएगी। आप जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। दिल की कोई मुराद पूरी हो सकती है। विपरीत लिंग के जातकों की मदद से आगे बढ़ने में आपको सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ की संभावना है। प्रेम संबंधों में प्यार और बढ़ेगा। सामाजिक समारोह में जाना पसंद करेंगे, साथ ही दोस्तों व रिश्तेदारों के संग अच्छा समय गुज़ारेंगे। बच्चे भी इस गोचर काल का पूरा आनंद उठाएंगे हालांकि उनकी सेहत में थोड़ी बहुत गिरावट आ सकती है। नए रिश्ते का आगमन हो सकता है। शादीशुदा ज़िंदगी और मज़बूत होगी।
उपाय: शुक्रवार को रिंग फिंगर में अच्छी क्वालिटी का ओपल रत्न धारण करें।

वृश्चिक

शुक्र आपकी राशि से दशम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में दशम भाव करियर, पिता की स्थिति, रुतबा, राजनीति एवं जीवन के लक्ष्यों की व्याख्या करता है। इसे कर्म भाव भी कहा जाता है। शुक्र के कर्म भाव में गोचर से आपको कार्य क्षेत्र में ज़बरदस्त लाभ होगा। आपके कार्य क्षेत्र का दायरा बढ़ेगा। करियर में तरक्की होगी। ऑफिस में आपको नई ज़िम्मेदारी मिल सकती है और आपका प्रभाव क्षेत्र भी बढ़ सकता है। किसी विदेशी कंपनी से संधि हो सकती है जो आपके करियर व बिज़नेस के लिए बेहद प्रगतिशील व लाभदायक साबित होगी। कार्य से संबंधी छोटी या फिर लंबी यात्रा भी संभव है। कार्यक्षेत्र पर बिज़नेस और लाइफ पार्टनर का सहयोग पूर्ण रूप से प्राप्त होगा। निजी संबंधों में प्रेम व सौहार्द बना रहेगा, बहस से बचें साथ ही कार्यालय में भी अनैतिक संबंधों से दूरी बनाए रखें।
उपाय: गाय की पूजा करें व उन्हें गुड़ खिलाएं।

धनु

शुक्र आपकी राशि से नवम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में नवम भाव को भाग्य भाव कहते हैं। इस भाव से व्यक्ति के भाग्य, गुरु, धर्म, यात्रा, तीर्थ स्थल, सिद्धांतों का विचार किया जाता है। गोचर के दौरान आपको अच्छे फलों की प्राप्ति होगी। भाग्य का साथ आपको कई क्षेत्रों में सफल परिणाम दिलाएगा। छात्रों को गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा। उनके आशीर्वाद से आप अपनी पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। आप अपने सिद्धांतों को आगे रखेंगे और उन्हीं के अनुसार कार्य करेंगे। सामाजिक कार्यों को करने में आपका मन लगेगा। साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य को करने से मन प्रसन्न रहेगा। इस अवधि में आप किसी तीर्थ यात्रा पर जा सकते हैं।
उपाय: हर गुरुवार को पीपल के वृक्ष को बिना छुए पानी दें।

मकर

शुक्र आपकी राशि से अष्टम भाव में स्थित होगा। वैदिक ज्योतिष में कुंडली के अष्टम भाव को आयुर्भाव कहा जाता है। इस भाव से जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव, अचानक से होने वाली घटनाएँ, आयु, रहस्य, शोध आदि को देखा जाता है। गोचर के प्रभाव से आपका मन भौतिक सुखों के प्रति अधिक लगेगा। मन में वासनात्मक विचार अधिक आएंगे। ऐसे में आपको इन पर नियंत्रण रखना होगा। कार्य क्षेत्र में थोड़ी परेशानियाँ आएंगी। लेकिन अगर आप मेहनत और ईमानदारी से अपना कार्य करेंगे तो इन परेशानियों को आसानी से दूर कर लेंगे। ससुराल पक्ष से रिश्ते बेहतर होंगे। संभव है कि उनकी ओर से आपको कोई प्यारा तोहफ़ा मिले। इस दौरान आपको सेहत से जुड़ी परेशानियाँ हो सकती है। लिहाज़ा अपनी सेहत का भी ध्यान रखें।
उपाय: हर रोज़ दुर्गा मंत्र का जाप करें।

कुंभ

शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में प्रवेश करेगा। ज्योतिष में कुंडली के सातवें भाव से व्यक्ति के वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी एवं जीवन के अन्य क्षेत्रों में बनने वाले साझेदारों का विचार किया जाता है। शुक्र का शुभ प्रभाव आपके वैवाहिक जीवन को मधुर बनाएगा। जीवनसाथी और आपके बीच सामंजस्य की स्थिति बनेगी। जीवनसाथी आपकी भावनाओं की कद्र करेगा, साथ ही आप दोनों के बीच प्रेम भी बढ़ेगा। निजी जीवन में सकारात्मकता आएगी। वहीं प्रेम जीवन में भी आप अपने लव पार्टनर के प्रति अधिक आकर्षित होंगे। दूसरी ओर, यदि आप किसी साझेदारी में व्यापार कर रहे हैं तो उसमें आपको ज़बरदस्त मुनाफ़ा होने की उम्मीद है। विपरीत लिंग के जातकों की मदद से आप अपने लक्ष्य को पाने में कामयाब रहेंगे।
उपाय: शुक्रवार को शुक्र यंत्र स्थापित करके पूजा करें।

मीन

शुक्र आपकी राशि से षष्टम भाव में गोचर करेगा। ज्योतिष में इस भाव को शत्रु भाव कहा जाता है। इस भाव से विरोधियों, रोग, पीड़ा, जॉब, कम्पीटीशन, रोग प्रतिरोधक क्षमता, शादी-विवाह में अलगाव एवं क़ानूनी विवादों को देखा जाता है। चूंकि शुक्र एक अच्छा ग्रह है और अच्छे ग्रह छठे, आठवें और द्वादश भाव में अच्छे फल नहीं देते हैं। इस दौरान आपको थोड़ा सतर्क रहना होगा। सेहत के नज़रिए से शुक्र का गोचर आपके लिए ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति में आपको अपनी सेहत पर ध्यान देना होगा। वहीं कार्य क्षेत्र में आपको अपने विरोधियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। वे आपके ख़िलाफ़ कोई साज़िश रच सकते हैं। इस अवधि में अपने शत्रुओं से न उलझे। अगर किसी कॉम्पीटीशन की तैयार कर रहे हैं तो अपनी मेहनत को दोगुना कर लीजिए। क्योंकि कठिन परिश्रम के बल पर ही आपको सफलता मिलने की संभावना है। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाकर रखने की सलाह आपको दी जाती है।

सूर्य का सिंह राशि में गोचर (17 अगस्त, 2019)

नवग्रहों के स्वामी सूर्य देव को हिन्दू धर्म में विशेष रूप से देवता के रूप में पूजा जाता है। सूर्य देव को इस संसार के जगत पिता की उपाधि भी प्राप्त है क्योंकि उनके बिना इस धरती पर जीवन की कल्पना नहीं जा सकती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य देव को खासतौर से सिंह राशि का स्वामी माना जाता है। व्यक्ति की कुंडली में सूर्य के प्रभाव से जीवन में तरक्की, सफलता और सम्मान के साथ ही पिता के साथ बेहतर संबंध भी स्थापित होते हैं।

सूर्य देव को मजबूत करने के लिए स्थापित करें सूर्य यंत्र

ग्रह योग और प्रकृति

वक्री शनि और उससे द्वादश गुरु बृहस्पति तथा सिंह-राशि मे सूर्य -- ये ग्रह स्थिति द्वितीय विश्व-युद्ध के आरंभ की है ।  17 अगस्त, 2019 को फिर ऐसा ही ग्रह योग बनने वाला है । विश्व की स्थिति भी विस्फोटक बनी हुई है । सिंह-राशि का सूर्य - शक्ति संचालकों को साहसिक निर्णय लेने में सहायता करता है । शनि से द्वादश - गुरु बृहस्पति, शनि को निरंकुश बना देता है और विध्वंस की आशंका बढ़ जाती है । हालांकि - ईश्वर सबकी रक्षा करेंगे । लेकिन - कश्मीर की स्थिति, ईरान में तनाव, उत्तरी कोरिया की उकसाने वाली कार्यवाही और रूस तथा चीन की दबाव वाली रणनीति आशंकाओं को बल देती है । प्रकृति का बिगड़ा मिज़ाज़ भी शुभ संकेत नही देता है । महाभारत युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने पाण्डवों से ऐसे ही प्राकृतिक संकेतों पर चर्चा की थी । जब महाघोर नामक धूमकेतु प्रकट हुआ था, एक ही माह में तीन-तीन ग्रहण हुये थे और आसमान - वर्षा, बिजली और तूफान का संकेत प्रकट करता था । 

18 सितंबर, 2019 तक शनि निरंकुश बना रहने वाला है । 

गोचर काल का समय

अब यही संसार की आत्मा, यानी सूर्य देव 17 अगस्त 2019, शनिवार को दोपहर 12:47 बजे कर्क राशि से सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे है। जो यहाँ 17 सितंबर 2019, मंगलवार 12:43 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। चूंकि सूर्य को सिंह राशि का स्वामित्व प्राप्त है अतः सूर्य के प्रभाव से सिंह राशि के जातकों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके अलावा सूर्य के इस संचरण से बाकी सभी राशियाँ भी ख़ासा प्रभावित होंगी। आईये इस भविष्यफल के माध्यम से जानते हैं समस्त 12 राशियों पर सूर्य के सिंह राशि में होने वाले गोचर का क्या प्रभाव पड़ने वाला है।

मेष राशि

सूर्य के सिंह राशि में गोचर के दौरान ये आपकी राशि से पांचवें भाव में विराजमान होंगें। गोचर की ये अवधि आपके लिए कार्यक्षेत्र में तरक्की ला सकती है। इस दौरान नौकरी की तलाश करने वाले लोगों को विशेष रूप से नयी नौकरी मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में आपको अपने सहयोगियों का भरपूर सहयोग मिलेगा और आप अपनी मंज़िल को पाने में कामयाब रहेंगे। वहीं दूसरी तरफ यदि आप किसी व्यवसाय से जुड़े हैं तो इस दौरान आपके व्यापार में वृद्धि होगी और शुभ फल की प्राप्ति होगी। सूर्य के नकारात्मक प्रभाव से इस दौरान आपके स्वभाव में कुछ परिवर्तन आ सकते हैं, आपमें अनावश्यक जिद्द या क्रोध आ सकता है। यदि आप प्रेम में हैं तो इस गोचर काल की अवधि में आपका प्रेम जीवन सामान्य रहेगा। लिहाजा इस दौरान इस बात का विशेष ख्याल रखें की अपने पार्टनर के साथ मतभेद की स्थिति ना उत्पन्न होने दें। वैवाहिक जीवन में भी आपको कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है लेकिन आपसी तालमेल बनाए रखने की वजह से आप इस स्थिति का सामना करने में सक्षम रहेंगे। गोचर की इस अवधि के दौरान आपको सरकारी स्तर पर लाभ मिलने के भरपूर योग नजर आ रहे हैं। कुल-मिलाकर देखा जाए तो मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का ये गोचर फलदायी साबित होगा।
उपायः विशेष लाभ प्राप्ति के लिए उगते हुए सूर्य को अपनी नग्न आँखों से देखें और जल का अर्घ्य दें।

वृषभ राशि

इस गोचर के दौरान सूर्य आपकी राशि से चौथे भाव में स्थापित होंगें। इस गोचर का नकारात्मक प्रभाव आपके पारिवारिक जीवन पर पड़ सकता है। गोचर की इस अवधि के दौरान आपके परिवार का माहौल थोड़ा अशांत रह सकता है। इसके अलावा परिवार के सदस्यों के बीच किसी बात को लेकर मतभेद की स्थिति बन सकती है। हालाँकि इस दौरान आपकी माता जी की सेहत में काफी सुधार देखने को मिलेगा जिससे मन को थोड़ी शांति मिलेगी। बात करें कार्यक्षेत्र की तो, सूर्य के गोचर की ये अवधि आपके कार्यक्षेत्र के लिए विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होने वाली है। इस दौरान कार्यस्थल पर आपकी पदोन्नति हो सकती है और आपके काम के लिए बॉस से सराहना भी मिल सकती है। इसी प्रकार से वैवहिक जीवन में भी इस दौरान स्थितियाँ सामान्य रहने वाली है, आपके जीवनसाथी को भी कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलेगी जिससे मन प्रफुल्लित रहेगा। वृषभ राशि के जातकों के लिए ये गोचर मध्यम फलदायी साबित होगा।
उपायः सूर्य के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए रविवार को नारियल एवं लाल फल की पूजा करें।

मिथुन राशि

सूर्य के सिंह राशि में गोचर के दौरान ये आपकी राशि से तीसरे भाव में स्थित होंगें। इस गोचर के फलस्वरूप आपके काम करने की क्षमता में वृद्धि होगी और आप हर परिस्थिति का मुक़ाबला करने के लिए खुद को पूरी तरह से सक्षम पाएंगे। गोचर की इस अवधि के दौरान विशेष सफलता प्राप्त करने के लिए आपको कठिन मेहनत करने की आवश्यकता होगी। इस दौरान जहाँ एक तरफ आपके साहस और पराक्रम में वृद्धि होगी वहीं दूसरी तरफ आप दृढ़ निश्चयी भी बनेंगे। इस गोचर काल के दौरान आप कहीं आस पास छोटी दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं, आपके लिए ये यात्रा कई मायनों में फलदायी साबित होगी। जहाँ तक पारिवारिक जीवन की बात है तो इस गोचर की अवधि में पैतृक संपत्ति को लेकर भाई बहनों के साथ मतभेद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे परिवार में अशांति का वातावरण रहेगा। परिवार में सुख शांति बनाए रखने के लिए मतभेद की स्थिति से बचकर रहें। जहाँ तक वैवाहिक जीवन का सवाल है तो, इस गोचर के दौरान आपको अपने जीवनसाथी का हर क्षेत्र में साथ मिलेगा। लिहाजा मिथुन राशि के जातकों के लिए गोचर की ये अवधि फलदायी सिद्ध होगी।
उपायः विशेष लाभ के लिए रविवार के दिन लाल कपड़े दान करें।

कर्क राशि

इस दौरान सूर्य आपकी राशि से दूसरे भाव में विराजमान होंगें। सूर्य के इस गोचर के दौरान आपके स्वभाव में विशेष रूप से परिवर्तन देखने को मिल सकता है। गोचर की इस अवधि में आपके क्रोध में इज़ाफा होगा और आपमें अहंकार भी देखने को मिल सकता है। लिहाजा इस गोचरकाल में आपको खासतौर से अपनी भाषा शैली पर संयम बरतने की आवश्यकता होगी। इस दौरान बातचीत के दौरान किसी के साथ भी कठोर शब्दों का प्रयोग ना करें। यदि आप शादीशुदा हैं तो इस दौरान आपके जीवनसाथी के स्वास्थ्य में गिरावट देखी जा सकती है। विवाहित जोड़े को इस समय विशेष रूप से अपने साथी की सेहत का ख्याल रखना होगा। पारिवारिक स्तर पर देखें तो सूर्य के इस गोचर के दौरान, परिवार के किसी सदस्य के साथ आपका वैचारिक मतभेद हो सकता है। बहरहाल गोचर काल की ये अवधि पारिवारिक रूप से आपके लिए तनावपूर्ण रहेगी। आर्थिक दृष्टिकोण से सूर्य का ये गोचर आपके लिए फलदायी साबित हो सकता है। इस दौरान आपको किसी अनजान स्रोत से आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही इस गोचर काल में आप पैसों की बचत करने में भी सफल रहेंगे जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। यदि आप सरकारी पेशे से जुड़े हैं तो इस समय आपको खासतौर से अपने उच्च अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। इस दौरान संभवतः आपका तबादला आपके पसंदीदा जगह पर भी हो सकता है। बहरहाल कर्क राशि के जातकों के लिए गोचर की ये अवधि सामान्य फलदायी साबित होने वाली है।
उपायः विशेष लाभ प्राप्ति के लिए भगवान शिव की आराधना करें और उन्हें खस का इत्र चढ़ाएँ।

सिंह राशि

चूँकि सूर्य का गोचर आपकी ही राशि में हो रहा है लिहाजा ये आपकी राशि से प्रथम भाव में या लग्न भाव में स्थित होंगें। सूर्य का ये गोचर आपके लिए विशेष रूप से फलदायी साबित होगा। सबसे पहले बात करें सामाजिक जीवन की तो, सामाजिक स्तर पर आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी और आप लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र होंगें। इस गोचरकाल की अवधि में आपका स्वास्थ्य भी आपका भरपूर साथ देगा और आप खुद को बेहद ऊर्जावान महसूस करेंगे। इस दौरान आप अपने व्यक्तित्व में एक ख़ास निखार का अनुभव करेंगे। हालाँकि इस दौरान आपके अंदर एक विशेष प्रकार का जोश तो जरूर नजर आएगा लेकिन आपको अपनी भाषा में संयम बनाए रखने की आवश्यकता होगी। इस दौरान आपके मुख से निकली कोई कड़वी बात आपके करीबी को चोट पहुंचा सकती है। इसलिए वाणी पर संयम बरतना सिंह राशि के जातकों के लिए इस दौरान विशेष रूप से आवश्यक है। यदि आप विवाहित हैं तो इस दौरान आप अपने जीवनसाथी के साथ रोमांटिक डिनर पर जा सकते हैं और विवाहित जीवन का आनंद उठा सकते हैं।
उपायः विशेष लाभ प्राप्ति के लिए तांबे के बर्तन से सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें।

कन्या राशि

इस दौरान सूर्य आपकी राशि से बारहवें भाव में विराजमान होगा। सूर्य के इस गोचर के दौरान आपके विदेश जाने की इच्छा पूरी हो सकती है। इसके साथ ही कार्यक्षेत्र की बात करें तो इस दौरान आप अपनी नौकरी में परिवर्तन कर सकते हैं। हालाँकि कोई भी फैसला लेने से पहले एक बार विचार ज़रूर कर लें। इसके अलावा सूर्य के गोचर के समय आप किसी हिल स्टेशन पर घूमने जाने की योजना बना सकते हैं। आर्थिक रूप से देखें तो इस गोचर के दौरान आपके ख़र्चों में वृद्धि हो सकती है, लिहाजा इस दौरान आपको विशेष रूप से उन चीजों पर ही खर्च करना चाहिए जिसकी आपकी जरुरत हो। पैसों का बचत ना करने से आप आने वाले दिनों में आर्थिक तंगी के शिकार हो सकते हैं। इस गोचर काल के दौरान कन्या राशि के जातकों को शत्रु पक्ष पर विजय प्राप्त होगी। इसके साथ ही यदि आपका कोई कोर्ट कचहरी का मामला चल रहा है तो फैसला यक़ीनन आपके पक्ष में आने की उम्मीद है। निजी तौर पर इस अवधि में आपको अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए और वाद विवाद की स्थिति से दूर रहना चाहिए। कुलमिलाकर देखा जाए तो कन्या राशि के जातकों के लिए ये गोचर मध्यम फलदायी साबित होगा।
उपायः विशेष लाभ प्राप्ति के लिए ‘’ॐ आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्!!’’ मंत्र का जाप करें।

तुला राशि

सूर्य के सिंह राशि में गोचर के दौरान ये आपकी राशि से ग्यारहवें भाव में स्थित होंगें। गोचर की ये अवधि आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। इस दौरान आपकी सरकारी क्षेत्र में कार्यरत लोगों से ख़ासा लाभ मिलने की संभावना बन रही है। उनके साथ आपके अच्छे संबंध स्थापित हो सकते हैं, लिहाजा इस समय लोगों के साथ घुलने-मिलने में भी आपको अपना समय देना चाहिये। इस गोचर काल के दौरान समाज में आपके मान सम्मान में भी वृद्धि होगी और आप ज्यादा से ज्यादा लोगों के संपर्क में आएँगे। तुला राशि के जातकों के प्रेम जीवन की बात करें तो आपके लिए ये अवधि थोड़ी चिंताजनक बीत सकती है। गोचर की इस अवधि में आपके पार्टनर के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इस दौरान आपको विशेष सलाह दी जाती है कि अपने पार्टनर के साथ किसी भी बात को लेकर मतभेद की स्थिति ना उत्पन्न होने दें। अब अगर पारिवारिक जीवन की बात करें तो, इस गोचर काल के दौरान आप अपने बच्चों की सेहत को लेकर परेशान रह सकते हैं। बहरहाल सूर्य के इस गोचर के दौरान उनकी सेहत का विशेष ध्यान रखें। इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपको अपने उच्च अधिकारियों का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा और आपके काम की सराहना होगी। जहाँ तक वैवाहिक जीवन की बात है तो गोचर की इस अवधि के दौरान आपके जीवनसाथी को कार्यक्षेत्र में तरक्की मिल सकती है या जॉब की तलाश में हैं तो इस दौरान नई नौकरी भी मिल सकती है।
उपायः सूर्य के हानिकारक प्रभाव से बचने के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का जप करें।

वृश्चिक राशि

इस गोचर के दौरान सूर्य आपकी राशि से दसवें भाव में विराजमान होगा। इस दौरान आपके लिए विशेष रूप से कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलने की अच्छी संभावना नजर आ रही है। इस गोचर काल के दौरान आपको कार्यक्षेत्र में विशेष रूप से पदोन्नति भी मिल सकती है। इसके साथ ही इस अवधि में आपको अपने काम में ख़ासा आनंद की अनुभूति होगी और कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना होगी। हालाँकि इस दौरान काम की अधिकता होने की वजह से आपको निजी जीवन में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। बहरहाल परिवार के सदस्य आपको इस बात के लिए ताने दे सकते हैं कि आप उनके साथ पर्याप्त समय नहीं गुजार पाते। गोचर की ये अवधि आपकी माता जी की सेहत में गिरावट ला सकता है, लिहाजा इस अवधि में उनकी सेहत का विशेष रूप से ख्याल रखने की जरुरत होगी। इसके साथ ही अगर वैवाहिक जीवन की बात करें तो आपके लिए ये अवधि खासतौर से सामान्य रहने वाली है। वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य के गोचर की ये अवधि निम्न फलदायी साबित होने वाली है।
उपायः विशेष लाभ के लिए इस मंत्र का जाप करें: ॐ ग्रिणिः सूर्याय नमः!!

धनु राशि

इस गोचर अवधि में सूर्य आपकी राशि से नवम भाव में स्थित होंगें। सूर्य का ये गोचर धनु राशि के जातकों के लिए सामाजिक रूप से काफी लाभदायक साबित होने वाला है। लिहाजा गोचर की इस अवधि में समाज में आपकी छवि काफी अच्छी बनेगी और आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी। इसके साथ ही इस दौरान समाज के कुछ बेहद प्रभावशाली लोगों के संपर्क में भी आने का अवसर आपको मिल सकता है। इस गोचर काल के दौरान धार्मिक अनुष्ठानों में आपकी रुचि ज्यादा होगी और आप दान पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों में ज्यादा समय व्यतीत करेंगे। गोचर की इस अवधि के दौरान संभावना है कि आप किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। आपके भविष्य के लिए ये यात्रा लाभकारी साबित हो सकती है। पारिवारिक स्तर पर आपके लिए ये गोचर चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। इस दौरान पिता की सेहत बिगड़ने की वजह से मन अशांत रहेगा और परिवार में भाई बहनों के साथ किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। हालाँकि कार्यक्षेत्र की बात करें तो यहाँ भाग्य का आपको पूरा साथ मिलेगा। धनु राशि के जातकों के लिए सूर्य के गोचर की ये अवधि मध्यम फलदायी साबित होगी।
उपायः विशेष लाभ प्राप्ति के लिए रविवार के दिन उत्तम कोटि का रूबी रत्न पहनें।

मकर राशि

सूर्य के सिंह राशि में गोचर के दौरान ये आपकी राशि से आठवें भाव में स्थित होंगें। गोचर की इस अवधि के दौरान आपके स्वास्थ्य में विशेष रूप से कुछ गिरावट आ सकती है। लिहाजा इस दौरान आपको अपनी सेहत का विशेष ख़्याल रखने की आवश्यकता होगी। इस गोचरकाल के दौरान आप किसी दुर्घटना के शिकार हो सकते हैं, इसलिए इस समय आपको ख़ास सावधानी बरतने की हिदायत दी जाती है। आर्थिक रूप से देखें तो सूर्य का ये गोचर आपके लिए जहां एक तरफ धन लाभ लेकर आएगा वहीं दूसरी तरफ आपको धन हानि भी हो सकती है। आपको विशेष रूप से सलाह दी जाती है कि इस समय पैसों को लेकर सावधानी बरतें और अपने ख़र्चों पर काबू रखें। यदि आप शादीशुदा हैं तो गोचर की अवधि में आपके जीवनसाथी के सामने आपका कोई ऐसा राज सामने आ सकता है जिसे आप लंबे समय से छुपाने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान विशेष रूप से ऐसे कामों में संलग्न ना हो जिससे आपकी छवि खराब होती हो। सूर्य का ये गोचर मकर राशि के जातकों के लिए सामान्य रहेगा।
उपायः सूर्य गोचर के हानिकारक प्रभाव से बचने के लिए विशेष रूप से रविवार के दिन गेहूँ का दान करें।

कुंभ राशि

इस गोचर के दौरान सूर्य आपकी राशि से सातवें भाव में विराजमान होगा। बहरहाल आपकी राशि में सूर्य की ये स्थिति आपके वैवाहिक जीवन के लिए मुसीबत पैदा कर सकती है। इस दौरान जीवनसाथी के साथ किसी बात को लेकर आपका मतभेद हो सकता है। वैवाहिक जीवन में सुख शांति बनाए रखने के लिए विशेष रूप से जीवनसाथी के साथ उत्पन्न होने वाली विवाद की स्थिति से बचें और किसी भी मामले को प्यार से सुलझाने की कोशिश करें। स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो इस दौरान आप अपनी सेहत को लेकर परेशान हो सकते हैं। बेहतर स्वास्थ्य लाभ के लिए गोचर की इस अवधि के दौरान आपको अपना खान पान अच्छा रखने के साथ ही एक हेल्दी रूटीन भी अपनाना चाहिए। कार्यक्षेत्र की बात करें तो आपके लिए सूर्य के गोचर का ये समय विशेष रूप से लाभदायक साबित होगा। इस दौरान आपकी पदोन्नति के साथ ही आय में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। यदि आप काफी वक़्त से नौकरी बदलने की सोच रहें हैं तो आपके लिए सूर्य के गोचर की ये अवधि विशेष रूप से सहायक साबित हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ यदि आप किसी व्यापार से जुड़े हैं तो इस दौरान आपको अपने बिज़नेस पार्टनर के साथ से विशेष लाभ प्राप्त हो सकता है। कुंभ राशि के जातकों के लिए भी ये अवधि ख़ासा लाभदायक साबित हो सकती है।
उपायः सूर्य के हानिकारक प्रभाव से बचने के लिए ब्राह्मणों को गुड़ दान में दें।

मीन राशि

इस दौरान सूर्य आपकी राशि से छठे भाव में विराजमान होंगें। इस गोचर काल में आप अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सफल रहेंगे। सूर्य के इस गोचर का नकारात्मक प्रभाव आपके वैवाहिक जीवन पर देखा जा सकता है। इस दौरान आप अपने जीवनसाथी के व्यवहार में थोड़ी आक्रामकता देख सकते हैं। बात करें आर्थिक जीवन की तो, आपको इस दौरान विशेष रूप से अपने ख़र्चों पर काबू रखने की आवश्यकता है। हालाँकि आपको धन लाभ तो ज़रूर होगा बावजूद इसके अगर आपने अभी से सूझ-बूझ से काम ना लिया तो आप आर्थिक तंगी के शिकार भी हो सकते हैं। यदि आपका कोर्ट कचहरी का कोई मामला चल रहा है तो संभव है कि इस दौरान फैसला आपके पक्ष में आये। मीन राशि के छात्रों के लिए गोचर की ये अवधि विशेष रूप से लाभदायक साबित होने वाली है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को इस दौरान विशेष रूप से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। यदि स्वास्थ्य के लिहाज से देखें तो सूर्य के गोचर की ये अवधि आपके लिए शारीरिक पीड़ा का कारण भी बन सकती है। इस गोचर काल में आप बुखार या सिरदर्द की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं। लिहाजा मीन राशि के जातकों के लिए गोचर की ये अवधि समान्य फलदायी साबित हो सकती है।
उपायः विशेष लाभ प्राप्ति के लिए रविवार के दिन बैल को गेहूँ व गुड़ खिलाएँ।

मंगल का सिंह राशि में गोचर (9 अगस्त 2019)

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल ग्रह को देवताओं का सेनापति माना जाता है इसलिए यह मानव जीवन के लिए ऊर्जा, शक्ति एवं पराक्रम का मुख्य कारक ग्रह है। जन्म कुंडली में मंगल साहस और संकल्प शक्ति को दर्शाता है। यह मेष एवं वृश्चिक राशियों पर आधिपत्य रखता है तथा कर्क राशि में नीच और मकर राशि में उच्च अवस्था में माना जाता है। मेष इसकी मूल त्रिकोण राशि भी है। यह दक्षिण दिशा का स्वामी और अग्नि तत्व का प्रधान ग्रह है। कर्क व सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल एक योग कारक ग्रह है। कुंडली में तीसरे, छठे, दसवें एवं ग्यारहवें भाव में मंगल की स्थिति अत्यंत शुभ मानी गई है।

मंगल गोचर का समय

प्रत्येक राशि में लगभग 45 दिन तक संचरण करने वाला यही मंगल ग्रह अब एक बार फिर अपना राशि परिवर्तन करते हुए 9 अगस्त 2019, शुक्रवार की सुबह 04:32 बजे कर्क से सिंह राशि में गोचर करेगा और 25 सितम्बर 2019, बुधवार को प्रातः 05:56 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा।

मेष

मंगल का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में होने वाला है। काल पुरुष की कुंडली में यह भाव सिंह राशि का होता है। यह भाव कारक है आपकी विद्या, ज्ञान और संतान का। इस दौरान आर्थिक पक्ष को मजबूत करने के लिए और आय प्राप्ति के लिए आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है। नए विषयों को जानने एवं उन्हें सीखने के लिए आप इस दौरान उत्सुक रहेंगे और नयी चीजों को बहुत जल्दी सीख जाएंगे। प्रेम जीवन में आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, इस दौरान अपने संगी से विनम्रता के साथ बात करें। ऐसी कोई भी बात न कहें जिससे उनको ठेस पहुँचे। जीवनसाथी की ओर से आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। बच्चों को बुखार अथवा रक्त से संबंधित रोग हो सकते हैं इसलिए उनका विशेष ख्याल रखें। समस्या को ज्यादा न बढ़ने दें और अच्छे चिकित्सक से सलाह लें। आपको भी स्वास्थ्य पर ध्यान देना होगा।
उपायः ‘’ॐ क्राम क्रीम क्रौम सः भौमाय नमः!!’’ मंत्र का जाप करें।

वृषभ

मंगल ग्रह का संचरण आपकी राशि से चतुर्थ भाव में होगा। इस दौरान घर में खुशियों का माहौल रहेगा लेकिन ख्याल रखें आपकी खुशियों को किसी की नज़र लग सकती है। अपने धन की चर्चा बाहर के लोगों के साथ न करें। इस दौरान आप परिजनों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास करें और माता-पिता की सेहत का भी विशेष ध्यान रखें। कार्यक्षेत्र में जीवनसाथी को पदोन्नति मिलने की प्रबल संभावना है। वैवाहिक जीवन में क्रोध और अहंकार को बिल्कुल भी जगह न दें। कार्यक्षेत्र में आप अपने कार्यों को आसानी से पूरा करेंगे। आपकी आमदनी में भी वृद्धि होने के योग हैं। अपने स्वास्थ्य के प्रति इस दौरान सचेत रहें और बाहर का तला-भुना खाना खाने से बचें। छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए अपनी एकाग्रता को बढ़ाने की जरुरत है। इसके लिए आप योग का सहारा ले सकते हैं।
उपायः मंगलवार को अनार दान में दें।

मिथुन

मंगल ग्रह का गोचर आपकी राशि से तृतीय भाव में हो रहा है। इस भाव को पराक्रम भाव भी कहा जाता है। मंगल का गोचर आपके तृतीय भाव में होने से आपके उत्साह और जोश में वृद्धि देखी जा सकती है। इस गोचरीय अवधि में आप छोटी दूरी की यात्राओं पर जा सकते हैं और आपको इन यात्राओं से फायदा होने की भी पूरी संभावना है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में इस दौरान आपको विजय मिलेगी। इस राशि के जो जातक किसी खेल से संबंध रखते हैं उन्हें इस दौरान सकारात्मक परिणाम मिलने के पूरे आसार हैं। हालांकि पारिवारिक जीवन में आपको कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस समय आपके छोटे भाई-बहनों की तबियत में गिरावट देखने को मिल सकती है इसलिए उनका ख्याल रखें। आपका स्वास्थ्य सही रहेगा लेकिन अपनी क्षमता से अधिक काम करने की कोशिश न करें। छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे फल मिलेंगे। आपके सहपाठी आपसे मदद ले सकते हैं। 
उपायः मंगलवार को गुड़ का दान करना आपके लिए शुभ रहेगा।

कर्क

आपके द्वितीय भाव में मंगल के गोचर के चलते आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। इस दौरान आप धन की बचत कर पाने में सक्षम होंगे। इस भाव को आपकी वाणी का कारक माना जाता है। मंगल के गोचर के कारण आपकी वाणी में कर्कशता देखने को मिल सकती है, इस दौरान ज्यादा बातें करने से बचें और उतना ही बोलें जितना जरूरी है। जो लोग प्रेम संबंधों में पड़े हैं वो अपने संगी को अपने मन की बातों को बताने में हिचकिचा सकते हैं। वैवाहिक जीवन सामान्य रहेगा, इस समय अपने जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। छात्रों के लिए यह समय अच्छा है इस दौरान आप शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए जीवन में कुछ बदलाव ला सकते हैं। इस राशि के कारोबारियों को व्यापार में लाभ होने की पूरी संभावना है। जिन लोगों की वजह से आपको मुनाफ़ा हुआ उनकी अहमियत को आप समझेंगे। व्यापार के संबंध में यात्रा पर जा सकते हैं।
उपायः गले अथवा बाजु में अनंतमूल की जड़ी धारण करें।

सिंह

मंगल का गोचर आपकी ही राशि यानि आपके प्रथम भाव में होगा। काल पुरुष की कुंडली में यह स्थान मेष राशि का होता है और इससे हम आपके स्वभाव, शारीरिक सुख, रंग रूप, आपकी योग्यता आदि के बारे में पता लगाते हैं। मंगल के गोचर के दौरान आपको अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना होगा। इस अवधि में आपको व्यावसायिक और निजी दोनों ही क्षेत्रों में संभलकर चलना होगा। परिस्थितियां विपरीत हो सकती हैं लेकिन आपको धैर्य बनाए रखना होगा। वैवाहिक जीवन की स्थिति बेहतर करना चाहते हैं तो जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बिठाने की कोशिश करें। यह गोचर सामाजिक जीवन की दृष्टि से लाभदायक रहेगा इस वक्त आप अपनी बातों को बहुत सप्ष्टता के साथ लोगों के सामने रख पाएंगे। समाज में आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी। इस समय पिता के साथ आपके संबंधों में भी गर्मजोशी आएगी और आपके पिता के लिए यह गोचर लाभदायक रहेगा।
उपायः मंगलवार के दिन मंगल यंत्र स्थापित करें।

कन्या

मंगल देव आपकी राशि से द्वादश भाव में गोचर करेंगे। ज्योतिष में इस भाव को व्यय भाव भी कहा जाता है। इस भाव में मंगल के गोचर के दौरान आपके ख़र्चों में वृद्धि होने के आसार हैं साथ ही कुछ लोगों को काम के सिलसिले में किसी यात्रा पर जाना पड़ सकता है। इस दौरान किसी भी तरह के नियम कानून को तोड़ने की कोशिश न करें यह आपको भारी पड़ सकता है। स्वास्थ्य की स्थिति थोड़ी बिगड़ सकती है और दवाओं के ऊपर पैसे खर्च हो सकते हैं। हालांकि आपके भाई-बहनों के लिए यह गोचर शुभ रहेगा उन्हें इस समय विदेशों से लाभ होने की संभावना है। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ किसी तरह का मतभेद है तो आपसी बातचीत से इसे दूर करने की कोशिश करें। छात्रों को टाइम-टेबल बनाकर पढ़ाई करने की आवश्यकता है।
उपायः मंगलवार को लाल मसूर दान करें।

तुला

मंगल देव आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर करेंगे। इस भाव को लाभ भाव भी कहा जाता है। इस भाव में मंगल का गोचर आपको अच्छे फल देगा। आपसे जुड़े लोग इस समय आपको फायदा पहुंचा सकते हैं और आपके मन में छुपी कोई इच्छा इस दौरान पूरी हो सकती है। जो लोग प्रेम में पड़े हैं वो किसी बात को लेकर अपने प्रियतम से झगड़ सकते हैं। हालांकि कहासुनी के बाद जब आप दोनों को एक दूसरे की बातें समझ आएगी तो सारी समस्याएं सुलझ जाएंगी। इस दौरान आप अपने जीवनसाथी के साथ कहीं घूमने जा सकते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर इस राशि के लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। इस गोचर के चलते आप में ऊर्जा देखी जा सकती है और अपने काम करने की गति से आप अपने विरोधियों का मुंह बंद कर सकते हैं। अगर आप घर में छोटे हैं तो इस समय आप अपने बड़े भाई-बहनों की सहायता करने के लिए आगे आ सकते हैं। छात्रों को उन विषयों पर भी ध्यान देने की जरूरत है जिनमें उनको लगता है कि वो कमजोर हैं।
उपायः मंगलवार के दिन बंदरों को गुड़ व चना खिलाएँ।

वृश्चिक

मंगल का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में होगा। इस भाव को कर्म भाव भी कहा जाता है। इस दौरान आपको कार्यक्षेत्र में अच्छे फल मिलेंगे। आपने जो मेहनत बीते दिनों में की है उसका परिणाम अब सामने आएगा। इस राशि के कुछ जातकों को कार्यक्षेत्र में प्रमोशन मिल सकता है। हालांकि आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह की प्रगति मिलने से अपने अंदर घमंड न लाए। वो लोग जो अब तक बेरोज़गार हैं उन्हें नई जॉब मिल सकती है। पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। घर में किसी से बहस की स्थिति बनती है तो ऐसे में अपने गुस्से पर काबू रखने की कोशिश करें। आपकी माता के स्वास्थ्य में गिरावट देखने को मिल सकती है इसलिए उनकी उचित देखभाल करें। इस दौरान आप कई कामों में व्यस्त रहेंगे जिसके कारण अपने करीबियों को आप समय नहीं दे पाएंगे। आपकी व्यस्तता आपके जीवनसाथी को खिन्न कर सकती है। 
उपायः मंगलवार को व्रत रखें।

धनु

मंगल के इस गोचर के दौरान आपका नवम भाव सक्रिय रहेगा। नवम भाव से हम भाग्य, धर्म और पिता के बारे में विचार करते हैं। इस गोचर के चलते आपके मन में शांति का भाव रहेगा और आप कार्यक्षेत्र में पूरी लगन के साथ काम कर पाएंगे। हालांकि पारिवारिक जीवन में थोड़ा संभलकर चलना होगा क्योंकि इस समय आपके पिता के स्वास्थ्य में गिरावट देखने को मिल सकती है। इस वक्त अपने पिता की कोई बात आपको अच्छी न लगे तो उनके साथ बहस न करें। इस राशि के छात्रों के लिए यह समय अच्छा है। शिक्षा के क्षेत्र में गुरुजनों की आपको सहायता मिलेगा और इस राशि के कुछ छात्रों को विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण करने का मौक़ा मिल सकता है। प्रेम में पड़े इस राशि के जातकों के जीवन में प्यार और तकरार का सिलसिला चलता रहेगा। इससे रिश्ते में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। समाज में मान सम्मान बढ़ेगा और धार्मिक कार्यों में आपकी रूचि बढ़ेगी। इस दौरान आप किसी धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं।
उपायः प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएँ।

मकर

आपके अष्टम भाव में मंगल देव गोचर करेंगे। इस भाव में मंगल के गोचर के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। संतुलित भोजन और व्यायाम आपको कई परेशानियों से दूर रख सकते हैं। इस दौरान आपके चोटिल होने की भी संभावना है इसलिए अगर वाहन चलाते हैं तो सतर्कता से चलाएँ। वैवाहिक जीवन में प्यार बनाए रखें, कभी यदि विवाद की स्थिति बन रही है तो खुद पर काबू रखने की कोशिश करें, मामले को शांति से सुलझाने की कोशिश करें। आर्थिक पक्ष इस दौरान थोड़ा कमजोर रह सकता है। धन से जुड़े मामलों में आपको सतर्क रहने की जरूरत है। किसी को उधार देने से पहले उस व्यक्ति के बारे में अच्छी तरह से जान लें। आपके भाई बहनों की तबियत खराब हो सकती है। छात्रों को गलत संगति से बचने की जरूरत है। जो लोग आपको पसंद नहीं हैं उनके साथ ज़बरदस्ती समय न बिताएं, अपने वक्त की अहमियत हो समझें।
उपायः गणेश जी की नारंगी रंग की प्रतिमा की पूजा करें।

कुंभ

मंगल का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होगा। इस भाव को विवाह भाव भी कहा जाता है और इस भाव से जीवन में होने वाली साझेदारियों के बारे में पता चलता है। इस भाव में मंगल के गोचर के दौरान आपको कार्यक्षेत्र में अच्छे फल मिलेंगे। आपके काम से खुश होकर आपका बॉस आपकी तारीफ़ करेगा और आपके प्रोमोशन होने के भी पूरे आसार हैं। वैवाहिक जीवन में आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपके और आपके जीवनसाथी के बीच किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। इस दौरान अपने साथी से बातचीत का सिलसिला न तोड़े नहीं तो आपके बीच दूरियाँ बढ़ सकती हैं। हालांकि इस गोचर से आपके जीवनसाथी को लाभ मिलने के पूरे आसार हैं। इस राशि के छात्रों का मन इस समय खेलकूद में खूब लगेगा। इस गोचर के दौरान आपको अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना होगा। ज्यादा क्रोध करने की वजह से आपकी तबियत बिगड़ सकती है।
उपायः मंगलवार को गेहूँ दान करें।

मीन

मंगल देव आपकी राशि से षष्ठम भाव में संचरण करेंगे। इस भाव को शत्रु या अरि भाव भी कहा जाता है। इस दौरान आपको जीवन के कई क्षेत्रों में संघर्ष करना पड़ेगा। हालांकि आपकी कड़ी मेहनत हर बाधा को दूर कर देगी। छात्रों के लिए समय अच्छा है, खासकर वो छात्र जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे हैं उनकी मुलाक़ात इस दौरान कुछ ज्ञानी लोगों से हो सकती है जिसके चलते आपको कुछ ज़रुरी बातों का पता लगेगा। जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले चुके हैं उन्हें इस दौरान अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी आपको सफलता मिलेगी। ख़र्चों में कटौती करने के लिए आपको इस समय अच्छा बजट प्लान बनाने की जरूरत है। नौकरी पेशा लोग इस दौरान अपने काम को पूरी लगन के साथ करेंगे। वहीं कारोबारी लोग भी अपने काम के प्रति गंभीर रहेंगे और इससे आने वाले वक्त में उनको अच्छे परिणाम मिलेंगे।
उपायः ‘’ॐ भूमिदायै नमः!!’’ मंत्र का जाप करें।

वैदिक ज्योतिष में केतु ग्रह

केतु ग्रह, कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे प्रत्यक्ष जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष में केतु एक क्रूर ग्रह है, परंतु यदि केतु कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमज़ोर होने पर यह अशुभ फल देता है।

ज्योतिष में केतु ग्रह का महत्व

ज्योतिष में केतु ग्रह को एक अशुभ ग्रह माना जाता है। हालाँकि ऐसा नहीं है कि केतु के द्वारा व्यक्ति को हमेशा ही बुरे फल प्राप्त हों। केतु ग्रह के द्वारा व्यक्ति को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। यह आध्यात्म, वैराग्य, मोक्ष, तांत्रिक आदि का कारक होता है। ज्योतिष में केतु  को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन धनु केतु की उच्च राशि है, जबकि मिथनु में यह नीच भाव में होता है। वहीं 27नक्षत्र में केतु अश्विनीमघा और मूल नक्षत्र का स्वामी होता है। यह एक छाया ग्रह है। वैदिक शास्त्रो के अनुसार केतु ग्रह स्वरभानु राक्षस का धड़ है। जबकि इसके सिर के भाग को राहु कहते हैं।
भारतीय ज्योतिष के अनुसार केतु ग्रह व्यक्ति के जीवन क्षेत्र तथा समस्त सृष्टि को प्रभावित करता है। राहु और केतु दोनों जन्म कुण्डली में काल सर्प दोष का निर्माण करते हैं। वहीं आकाश मंडल में केतु का प्रभाव वायव्य कोण में माना गया है। कुछ ज्योतिषाचार्यों का ऐसा मानना है कि केतु की कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण जातक यश के शिखर तक पहुँच सकता है। राहु और केतु के कारण सूर्य और चंद्र ग्रहण होता है।

ज्योतिष के अनुसार, केतु ग्रह का मनुष्य जीवन पर प्रभाव

शारीरिक रचना एवं स्वभाव - ज्योतिष में केतु ग्रह की कोई निश्चित राशि नहीं है। इसलिए केतु जिस राशि में बैठता है वह उसी के अनुरूप फल देता है। इसलिए केतु का प्रथम भाव अथवा लग्न में फल को वहाँ स्थित राशि प्रभावित करती है। हालाँकि कुछ ज्योतिष विद्वानों का मानना है कि लग्न का केतु व्यक्ति को साधू बनाता है। यह जातकों को भौतिक सुखों से दूर ले जाता है। इसके प्रभाव से जातक लग्न अकेले रहना पसंद करता है। लेकिन यदि लग्न भाव में वृश्चिक राशि हो तो जातक को इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
बली केतु - यदि किसी जातक की कुंडली में केतु तृतीय, पंचम, षष्टम, नवम एवं द्वादश भाव में हो तो जातक को इसके बहुत हद तक अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। यदि केतु गुरु ग्रह के साथ युति बनाता है तो व्यक्ति की कुंडली में इसके प्रभाव से राजयोग का निर्माण होता है। यदि जातक की कुंडली में केतु बली हो तो यह जातक के पैरों को मजबूत बनाता है। जातक को पैरों से संबंधित कोई रोग नहीं होता है। शुभ मंगल के साथ केतु की युति जातक को साहस प्रदान करती है।
पीड़ित केतु - केतु के पीड़ित होने से जातक को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति के सामने अचानक कोई न कोई बाधा आ जाती है। यदि व्यक्ति किसी कार्य के लिए जो निर्णय लेता है तो उसमें उसे असफलता का सामना करना पड़ता है। केतु के कमज़ोर होने पर जातकों के पैरों में कमज़ोरी आती है। पीड़ित केतु के कारण जातक को नाना और मामा जी का प्यार नहीं मिल पाता है। राहु-केतु की स्थिति कुंडली में कालसर्प दोष निर्माण करता है, जो जातकों के लिए घातक होता है। केतु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए जातकों को केतु ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।
रोग - पैर, कान, रीढ़ की हड्डी, घुटने, लिंग, किडनी, जोड़ों के दर्द आदि रोगों को ज्योतिष में केतु ग्रह के द्वारा दर्शाया जाता है।
कार्यक्षेत्र - समाज सेवा, धर्म आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े सभी कार्यों को ज्योतिष में केतु ग्रह के द्वारा दर्शाया जाता है।
उत्पाद - काले रंग पुष्प, काला कंबल, काले तिल, लहसुनिया पत्थर आदि उत्पाद केतु से संबंधित हैं।
स्थान - सेवाश्रम, आध्यात्मिक एवं धार्मिक स्थान केतु से से संबंधित होते हैं।
पशु-पक्षी तथा जानवर - ज़हरीले जीव एवं काले अथवा भूरे रंग के पशु पक्षियों को राहु के द्वारा दर्शाया जाता है।
रत्न - लहसुनिया
रुद्राक्ष - नौ मुखी रुद्राक्ष
यंत्र - केतु यंत्र
रंग - भूरा।

मंत्र -

केतु का वैदिक मंत्र 
ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे। 
सुमुषद्भिरजायथा:।। 


केतु का तांत्रिक मंत्र
ॐ कें केतवे नमः 

केतु का बीज मंत्र
ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

धार्मिक दृष्टि से केतु ग्रह का महत्व

धार्मिक दृष्टि से राहु ग्रह का बडा़ महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब समुद्र मंथन से अमृत का कलश निकला तो अमृतपान के लिए देवताओं और असुरों के बीच झगड़ा होने लगा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और देवताओं और असुरों की दो अलग-अलग पंक्तियों में बिठाया। असुर मोहिनी की सुंदर काया के मोह में आकर सबकुछ भूल गए और उधर, मोहिनी चालाकी से देवताओं को अमृतपान कराने लगी।
इस बीच स्वर्भानु नामक असुर वेश बदलकर देवताओं की पंक्ति में आकर बैठ गया और अमृत के घूँट पीने लगा। तभी सूर्य एवं चंद्रमा ने भगवान विष्णु को उसके राक्षस होने के बारे में बताया। इस पर विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया और वह दो भागों में बँट गया, ज्योतिष में ये दो भाग राहु (सिर) और केतु (धड़) नामक ग्रह से जाने जाते हैं।
इस प्रकार आप समझ सकते हैं कि धार्मिक दृष्टि के साथ साथ ज्योतिष में केतु ग्रह का महत्व कितना व्यापक है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित 12 भाव उसके संपूर्ण जीवन को दर्शाते हैं और जब उन पर ग्रहों का प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति के जीवन में उसका असर भी दिखाई देता है।