Thursday, 28 June 2018

आपकी राशि :-मंगल के वक्री होने असर

ज्योतिष में मंगल को अशुभ ग्रह माना गया है। कुंडली में मंगल की महादशा होने पर यह 7 वर्षों तक रहती है। वर्तमान समय में मंगल अपने उच्च राशि मकर राशि में गोचर कर रहा था । मकर राशि में इन्हें उच्च प्रभाव देने वाला माना गया है। 27 जून 2018 की रात के 2 बजकर 35 मिनट पर मंगल उल्टी चाल चलने लगें हे  यानि कि मंगल अब वक्री हो गए हे । मंगल 27 अगस्त तक वक्री रहेगा । मकर राशि में केतु पहले से ही है. केतु हमेशा वक्री रहता है. इस कारण मकर राशि में दो वक्री ग्रह हैं असर  मंगल के वक्री होने से आपकी राशि से मंगल भाव के स्थान से सभी राशियों के लिए क्या असर होगा आप को बताते हे

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए मंगल अपने कर्म भाव यानी दसवें भाव में वक्री हो रहा है। जिसके कारण इस राशि के जातको के लिए काम का प्रेशर बढ़ जाएगा। जिससे तनाव रह सकता है। परिवार के सदस्यों के बीच मनमुटाव बढ़ने के आसार है। सेहत में भी गिरावट देखने को मिल सकती है।

वृष राशि- वृषभ राशि वालों के लिए मंगल भाग्य स्थान में उच्च होकर गोचररत हैं जहां वे वक्री हो रहे हैं। काम में रुकावटें आ सकती हैं कड़ी मेहनत करने के बाद भी आपको नकारात्मक परिणाम मिल सकता है। संतान की सेहत की चिंता सता सकती है।

मिथुन राशि- इस राशि वालों के लिए मंगल 8वें भाव में वक्री हो रहे हैं। आपको कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है। जिसका आपके ऊपर दबाब रह सकता है। अपने दुश्मनों से सावधान रहें कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं। काम करते समय धैर्य रखें।

कर्क राशि - आपकी राशि के लिए सप्तम भाव में मंगल का वक्री रहेगा। जिसके कारण से पति-पत्नी के बीच अनबन हो सकती है। करियर में बाधाएं आने के संकेत है। अनावश्यक खर्चों से बचें।

सिंह राशि- आपकी राशि में मंगल छठे भाव में वक्री होगा। कामकाज के मामले में भाग्य आपका साथ देगा। धन लाभ के कई मौके मिल सकते है। अपने विरोधियों से सावधान रहें, कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कन्या राशि -कन्या राशि वालों के लिये मंगल पंचम स्थान में वक्री हो रहे हैं। विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। धन निवेश करने से बचें क्योंकि यह सही समय नहीं है। पार्टनर से मनमुटाव हो सकता है।

तुला राशि- आपकी राशि से मंगल चौथे भाव में वक्री हो रहा है। जिससे कार्यक्षेत्र में बदलाव देखने को मिल सकता है। लग्जरी जीवन में परेशानी उठानी पड़ सकती है। धन की हानि हो सकती है।

वृश्चिक राशि- मंगल आपकी राशि के स्वामी भी हैं। पराक्रम में उच्च मंगल के वक्री होने से आपको मिलने लाभ कई गुना बढ़ सकता है। इस समय व्यवसाय करने वाले जातकों को प्रतिकूल स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

धनु राशि- इस राशि वालों के लिए मंगल धन भाव में वक्री हो रहे हैं। इस दौरान इस राशि के जातकों को पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की उम्मीद है। यात्रा के योग बन रहे है। महत्वपूर्ण कार्य में आपको भाग्य का साथ मिलेगा।

मकर राशि- मंगल इस समय आपकी राशि में गोचर है। इस राशि में मंगल के वक्री होने से लाभ मिलने के आसार कम ही है। नौकरी बदलने के लिए यह सही समय है। वाद-विवाद से बचें नहीं तो कानूनी मसलों में आप फंस सकते हैं।

कुंभ राशि- आपकी राशि के लिए मंगल 12वें भाव में वक्री होगा। जिसके कारण आपको प्रॉपर्टी से जुड़े लेन-देन में फायदा मिल सकता है। भाग्य का आपको साथ मिलेगा। धन लाभ के कई मौके मिल सकते हैं।

मीन राशि- इस राशि के जातकों के लिए मंगल लाभ के घर में वक्री हो रहा है। आपको कहीं से अतिरिक्त पैसा मिल सकता है। यह मकान और जमीन जायजाद से जुड़ा भी हो सकता है। इस शुभ समय का लाभ उठाएं।

27 जून 2018 :-मंगल अब वक्री हो गए हे ।

27 जून 2018 की रात के 2 बजकर 35 मिनट पर मंगल उल्टी चाल चलने लगें हे  यानि कि मंगल अब वक्री हो गए हे ।मंगल 27 अगस्त तक वक्री रहेगा । मकर राशि में केतु पहले से ही है. केतु हमेशा वक्री रहता है. इस कारण मकर राशि में दो वक्री ग्रह हैं

वक्री मंगल

ज्योतिष के अनुसार सभी ग्रह भ्रमण करते हुए विभिन्न प्रकार की गति को में चलते हैं जैसे कि तेज चलना या मंद गति से चलना, वक्री या अति वक्री, मध्यम गति या कुटिल गति इत्यादि. ग्रहों का अपने भ्रमण पथ पर उल्टी गति से चलना वक्रता कहलाता है, परंतु वास्तव में ग्रह उल्टे नहीं चलते बल्कि पृथ्वी की गति तथा ग्रह की गति के भेद एवं उस ग्रह की पृथ्वी से विशेष दूरी पर स्थित होने की वजह से वक्री प्रतीत होते हैं.

वक्री ग्रहों को वैदिक ज्योतिष में शक्त अवस्था में माना गया है अर्थात वक्री ग्रह सबसे अधिक शक्तिशाली होते हैं. वक्री का अर्थ है उलटा. ग्रह गोचर में हमें वक्री अवस्था में चलते प्रतीत होते हैं जबकी वास्तविकता में वह मार्गी गति में ही विचरण करते हैं. वक्री ग्रह बार-बार प्रयास कराते हैं. एक ही कार्य को करने के लिए व्यक्ति को कई बार प्रयास करने पर सफलता मिलती है. ग्रह की वक्रता उसके अन्य ग्रहों से संबंध के आधार आनुसार फल दर्शाती है.

वक्री मंगल का प्रभाव

मंगल साहस, पराक्रम और उत्साह शक्ति प्रदान करने वाले माने जाते हैं. अत: कुण्डली में मंगल के वक्री होने कारण जातक में असहिष्णुता का भाव, अत्यधिक क्रोध और आक्रामक होना देखा जा सकता है. जातक की कार्यक्षमता सृजनात्मक नही रहती है. वक्री मंगल की दशा या अन्तर्दशा में व्यक्ति का लोगों से अधिक मतभेद हो सकता है या वह मुकदमेबाजी और कोर्ट कचहरी के चक्करों में फंस सकता है.

वक्री मंगल यदि जन्मांग में 6,8 या 12 भाव में हो तो व्यक्ति में जिद्दीपन देखा जा सकता है. व्यक्ति के व्यवहार में अड़ियल रुख हो सकता है. उसके कार्य अधूरे भी रह सकते हैं या उनमें रूकावटें उत्पन्न हो सकती हैं.

व्यक्ति किसी से भी सहयोग करना अपना अपमान समझ सकता है. जातक को स्वार्थी बना सकता है. व्यक्ति अपनी संतुष्टि एवं स्वार्थ सिद्धि के लिए किसी भी प्रकार के अनुचित कार्य करने में भी संकोच नहीं करता और वक्री मंगल की दशा में जातक को अकसमात होने वाली घटनाओं का सामना भी करना पड़ सकता है.

वक्री मंगल के लिए उपाय

वक्री मंगल के बुरे प्रभावों से बचने के लिए कुछ कार्यों को किया जा सकता है जैसे वक्री मंगल की दशा या अन्तर्दशा में अस्त्र शस्त्रों को नही खरीदें और उनके उपयोग से बचें अपने निवास स्थान पर घातक वस्तुओं को नही रखें. वक्रता के समय कोई नया वाहन या नई संपत्ति को नही खरीदें.

वक्री मंगल की दशा में गृह प्रवेश नहीं करना चाहिए. किसी भी प्रकार के आपरेशन या सर्जरी को नही कराएं. इस समय नया मुकदमा आरंभ करना उचित नहीं होता, क्योंकि इससे धन का नाश और संताप ही प्राप्त होगा. मंगल की वक्रता में छल कपट धोखा देना व्यक्ति के स्वभाव में देखा जा सकता है.

मंगल की वक्रता में मंगल मंत्र का जाप करना चाहिए, श्री हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए तथा हनुमान जी को सिंदूर चढा़ना चाहिए. बंदरों को गुड़-चने खिलाना चाहिए. माँस व मदिरा, धूम्रपान से परहेज करना चाहिए.

वक्री ग्रह के संदर्भ में ज्योतिषशास्त्र की यह भी मान्यता है कि शुभ ग्रह वक्री होने पर व्यक्ति को सभी प्रकार का सुख, धन आदि प्रदान करते हैं जबकि अशुभ ग्रह वक्री होने पर विपरीत प्रभाव देते हैं. इस स्थिति में व्यक्ति व्यसनों का शिकार होता है, इन्हें अपमान का सामना करना होता है.तो एक अन्य सिद्धान्त यह भी है कि वक्री ग्रहों की दशा में सम्मान एवं प्रतिष्ठा में कमी की संभावना रहती है. कुण्डली में क्रूर ग्रह वक्री हों तो इनकी क्रूरता बढ़ती एवं सौम्य ग्रह वक्री हों तो इनकी कोमलता बढ़ती है.इसलिए किसी ग्रह के प्रभाव का फल कथन करने से पूर्व कुण्डली का अवलोकन अवश्य करना चाहिए

Friday, 1 June 2018

अनुभव शानदार :-आध्यात्मिक

आप ऐसा जीवन जीएं जैसे आपके सिवाय दुनिया में कोई है ही नहीं
आध्यात्मिक प्रक्रिया की बुनियादी बात यह है कि आप ऐसा जीएं कि जैसे केवल आप ही मौजूद हैं। आपके सिवाय कोई नहीं, क्योंकि आप हर किसी में खुद को देखते हैं।
लोग मुझसे पूछते हैं कि आप जहां भी जाते हैं कहीं चंद लोग होते हैं तो कही एक लाख लोग, आप उनके बीच बोलते कैसे है? मैं उनसे ऐसे ही बात करता हूं जैसे मैं खुद से करता हूं। कोई दूसरा है ही नहीं। मैं जो करता हूं वह कोई प्रवचन या वक्तृत्व नहीं है। मैं तो सिर्फ ऐसे बात करता हूं जैसे खुद से करता हूं,
क्योंकि मुझे दूसरा कोई दिखता ही नहीं है। आध्यात्मिक प्रक्रिया का मतलब है कि किसी तरह आपके अनुभव में आप सर्व-समावेशी हो जाते हैं। आपके जीवन से तुलना और स्पर्धा गायब हो जाती है। वरना जो कभी तुलना से शुरू होता है, समय के साथ वह स्पर्धा हो जाती है और तब उसका रूप भद्‌दा हो जाता है। जब तुलना और स्पर्धा होती है तो खुशी, मौज-मजा जैसी जीवंत व सुंदर चीज भी भद्‌दी हो जाती है। खुशी आपके जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू है। खुशी का मतलब है आपके अस्तित्व का आपका अनुभव शानदार है।
जब आप सर्व-समावेशी हो जाते हैं तो आपके अस्तित्व का अनुभव सुंदर हो जाता है और इसीलिए आप खुशी से भर जाते हैं। अब मैं खुश हूं इसलिए नहीं कि मैं बेस्ट डोसा बनाता हूं या आपसे बेहतर डोसा बनाता हूं और न मैं इसलिए खुशी महसूस करूंगा, क्योंकि मैं उस सर्वोत्तम व्यंजन का लुत्फ लूंगा जो आप बनाते हैं।
मैं आपके यहां आने के पहले ही मैं खुशी से भर जाऊंगा। आप कुछ अच्छा बनाते हैं तो मैं प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण कर लूंगा। यदि कुछ खराब बनता है तो उसी प्रसन्नता से मैं उसे परे रख दूंगा। आपके अच्छे-बुरे पकाने से आप मुझे खुशी नहीं दे सकते और न उसे चुरा ही सकते हैं। मैं चाहूंगा कि इस दुनिया के सभी लोग इस तरह बन जाएं कि कोई भी आपकी भीतर की स्थिति को नियंत्रित न कर सके।

गायत्री मंत्र का जप:-बड़ा ही चमत्कारी

गायत्री मंत्र का जप करते समय इन पांच बातों का रखें ध्यान

ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् !!
गायत्री मंत्र को वेदों में बड़ा ही चमत्कारी और फायदेमंद बताया गया है। वेदों की कुल संख्या चार है। इन चारों वेदों में गायत्री मंत्र का उल्लेख किया गया है।
माना जाता है कि इस मंत्र में इतनी शक्ति है कि नियमित तीन बार इसका जप करने वाले व्यक्ति के आस-पास नकारात्मक शक्त‌ियां नहीं फटकती हैं। गायत्री मंत्र के जप से कई प्रकार का लाभ मिलता है। इस मंत्र के जप से बौद्ध‌िक क्षमता और मेधा शक्ति यानी स्मरण की क्षमता बढ़ती है।
गलत तरीके से जप करने पर नहीं मिलता है अपेक्षित फल
1. गायत्री मंत्र को पढ़ते समय आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए, जैसे पदमासना, अर्धपद्मासन और सिद्धआसना। किसी आसान पर बैठकर ही गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए।
2. इस मंत्र का जाप नहाधोकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर करना चाहिए।
3. गायत्री मंत्र का जप सूर्योदय से दो घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त से एक घंटे बाद तक कि‌या जा सकता है। मौन मानसि‌क जप कभी भी कर सकते हैं, लेकि‌न रात्रि‌ में इस मंत्र का जप नहीं करना चाहि‌ए। माना जाता है कि‌ रात में गायत्री मंत्र का जप लाभकारी नहीं होता है।
4. अगर माला से गायत्री मंत्र का जप करना चाहते हैं तो 108 मनकों की माला को रखें। इसके लिए तुलसी की माला या चंदन की माला रखें।
5. इसे जल्दी-जल्दी नहीं पढ़ना चाहिए। इसके महत्व को समझकर ही उच्चारण करना चाहिए।

तन स्फूर्त रहे, मन नियंत्रित रहे

मन नियंत्रित हो तो मूर्छा नहीं घेरेगी
थके हुए तन को नींद जल्दी और आसानी से आ जाती है। तन को नींद लाने के लिए कुछ और तरीके भी अपनाए जाते हैं या कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिनसे बिना थके भी नींद आने लगती है।
जैसे बच्चे लोरी सुनकर सो जाते हैं। बड़े भी लोरी सुनते हैं पर उनकी लोरी का रूप-ढंग बदल जाता है। कुछ लोगों के लिए टीवी लोरी का काम करते हैं। देखते-देखते ही नींद आ जाती है।
पति-पत्नी की आपस की बातचीत भी लोरी जैसी ही होती है। पत्नी बोलती रहे, पति सो जाता है। पति बात कर रहा है, पत्नी ऊंगने लगती है। नींद का काम से बड़ा संबंध है। आप यदि कुछ ऐसा सुनते हैं, जिससे भीतर तरंग पैदा हो तो नींद आ जाती है।
जिस प्रकार नींद काम से जुड़ी है, ऐसे ही मूर्छा का मन से संबंध है। नींद और मूर्छा में सबसे बड़ा फर्क यह है कि नींद में सोते हुए भी आप होश में हैं और मूर्छा में बेहोश है।
मूर्छा दो तरह की होती है। तन की मूर्छा अस्वस्थता का लक्षण है पर मन यदि ज्यादा चल ले, विलास और भोग का दोहराव कर ले तो ऐसा मन तन को मूर्छा दे देता है। इस मूर्छा में आदमी का शरीर चलता है, आखें खुली मिलेंगी लेकिन, वह बेहोश होगा और इसी बेहोशी में वह गलत काम करता है।
जिनकी नींद अच्छी होगी वे जागने पर स्फूर्त होंगे। उनमें स्फूर्ति होगी और जैसे ही आप जागें, सबसे पहला काम मन पर करिए वरना जागते हुए भी दिनभर बेहोश हो सकते हैं।
तन स्फूर्त रहे, मन नियंत्रित रहे तो कभी कोई ऐसी मूर्छा नहीं घरेगी जो आपसे गलत काम करा दे।

अभिभावक दिवस:-उन्हें आपके सहारे की बहुत जरूरत है।

1 जून 2018 अभिभावक दिवस

पेड़ यदि अपनी जड़ देखने की जिद पर उतर आए तो क्या देख सकता है?
यह लगभग नामुमकिन-सा है, लेकिन जड़ें हैं तो सही। तो पेड़ को यकीन करना पड़ेगा कि जड़ें हैं, पर मैं देख नहीं सकता। बस, यही पेड़ और इंसान का फर्क है।
इंसान की जड़ उसकी आत्मा है। वह यदि अपनी आत्मा को देखना चाहे तो क्या देख सकता है? इस सवाल का उत्तर है सीधे-सीधे तो नहीं देख सकता लेकिन, अनुभूत जरूर कर सकता है।
हां, एक दृश्य ऐसा है जहां वह आत्मा को देख सकता है और वह है अपने माता-पिता। माता-पिता जड़ की तरह हैं। पेड़ तो कभी जड़ नहीं देख पाएगा पर आप अपनी जड़ें देख सकते हैं।
जिन लोगों ने माता-पिता को ठीक से जी लिया, उनको आत्मा की अनुभूति आसानी से हो जाएगी। माता-पिता को देखना, साथ रहना, उनका सम्मान करना बिल्कुल अलग बात है लेकिन, अपने जन्मदाताओं को जी लेना अलग मामला है।
दुनिया आज अभिभावक दिवस मना रही है। यह इसीलिए मनाया जाता है कि हम अपने माता-पिता को जी सकें। देखते तो हैं, क्योंकि उन्होंने जन्म दिया है, साथ में रहते हैं लेकिन, उन्हें जीना अहसास का मामला है। जितना माता-पिता को जीएंगे उतना ही जान जाएंगे, आत्मा होती क्या हैं।
पढ़-लिखकर कितनी ही उपलब्धियां हासिल कर लें, काम-काज के सिलसिले में घर से दूर जाना पड़े तो जाएं, परंतु जड़ों से नहीं कटें।
एक दिन माता-पिता की ओर लौटकर जरूर आएं। अब आपको उनकी जरूरत भले ही कम या नहीं हो, लेकिन उन्हें आपके सहारे की बहुत जरूरत है।

योग्यता पर भरोसा रखें, ईश कृपा भी न भूलें

योग्यता पर भरोसा रखें, ईश कृपा भी न भूलें

यदि आप सक्षम हैं तो बड़े से बड़ा इरादा कर सकते हैं, कई इरादों को बदलने में समर्थ हो सकते हैं। और समर्थ हैं तो बहुत सारे दृश्य बदलने में सक्षम हो जाएंगे।
लेकिन जि़ंदगी का अगला दृश्य क्या होगा यह बड़े से बड़ा सामर्थ्यवान भी पता नहीं लगा सकता। जीवन की खूबी उसके अज्ञात होने में है। इसमें बहुत कुछ ऐसा घटने वाला है जो समर्थ से समर्थ व्यक्ति भी जान नहीं सकता। वो जब घटता है और तब आप जो निर्णय लेते हैं, उससे पता लगता है आपकी तैयारी कैसी है।
अंगद ने भरी राजसभा में रावण को चुनौती देते हुए एक ऐसा संवाद बोल दिया कि सब चौंक गए।
तुलसीदासजी ने लिखा है-
जौं मम चरन सकसि सठ टारी। फिरहिं राम सीता मैं हारी।।
यदि तू मेरा चरण हटा सके तो श्रीराम लौट जाएंगे और मैं सीताजी को हार गया। यह अत्यधिक जोश में कही गई बात है। अंगद युवा थे।
युवाओं के पास जोश होता है पर थोड़ा होश खो देते हैं। चलिए, जोश को फिर भी भगवान संभाल लेंगे पर रावण ने जो कहा वह तो उसकी मूर्खता ही थी।
'सुनहु सुभट सब कह दससीसा। पद गहि धरनि पछारहु कीसा।।
रावण अपने सैनिकों से कहता है- पैर पकड़कर इस बंदर को पृथ्वी पर पछाड़ दो। विश्वविजेता रावण को लगा इसने दांव चला है तो मैं भी चल दूं। ये तो जुआरी के लक्षण हैं।
ध्यान रखिए, जब जीवन में अप्रत्याशित घटनाएं हों तो रावण की तरह मूर्खता न करें। अपनी योग्यता पर भरोसा रखें, ईश्वर की कृपा को न भुलाएं। फिर कैसी भी विपरीत परिस्थिति आए जाए, आप अनुचित निर्णय नहीं लेंगे।